रायगढ़ में भू-माफियाओं का बड़ा खेल: देउरमार में शासकीय पट्टे की अहस्तांतरणीय जमीन की जिला पंजीयक कार्यालय में कराई गई रजिस्ट्री

कुड़ेकेला :- रायगढ़ जिले में शासकीय पट्टे की जमीनों के अवैध क्रय-विक्रय और भू-माफियाओं का सिंडिकेट लगातार सक्रिय है। जिले में सक्रिय बिचौलिए और भू-माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि स्थानीय स्तर पर नियमों का हवाला देकर रजिस्ट्री से इंकार किए जाने पर वे सीधे उच्च स्तर का रुख कर रहे हैं। ताजा मामला सामने आया है कि जहां स्थानीय उप-पंजीयक द्वारा विवादित और प्रतिबंधित भूमि का पंजीयन करने से मना करने पर, आरोपियों ने जिला पंजीयक कार्यालय पहुंचकर इस अवैध खेल को अंजाम दे दिया। इस पूरी प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लागू स्वतः म्यूटेशन (नामंतरण) की व्यवस्था इन माफियाओं के लिए वरदान साबित हो रही है, क्योंकि रजिस्ट्री होते ही जमीन का स्वतः नामंतरण हो जाता है।

धरमजयगढ़ को बायपास कर जिला मुख्यालय में कराई गई रजिस्ट्री

ऐसा ही एक चौकाने वाला मामला रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ ब्लॉक अंतर्गत छाल तहसील क्षेत्र से सामने आया है। छाल तहसील के ग्राम देउरमार स्थित खसरा नंबर 5/2/ख, रकबा 1.4610 हेक्टेयर जमीन का क्रय-विक्रय पंजीयन स्थानीय धरमजयगढ़ उप-पंजीयक कार्यालय में कराने के बजाय सीधे रायगढ़ जिला पंजीयक कार्यालय में 5 मार्च 2026 को कराया गया। स्थानीय कार्यालय को बायपास कर जिला मुख्यालय में गुपचुप तरीके से पंजीयन कराने की इस प्रक्रिया से अधिकारियों और भू-माफियाओं के बीच गहरी साठगांठ की बू आ रही है।

शासकीय रिकॉर्ड में स्पष्ट दर्ज है ‘अहस्तांतरणीय’, फिर भी बेच दी जमीन

दस्तावेजों की पड़ताल करने पर इस बड़े घोटाले की पोल खुल जाती है। ग्राम देउरमार की यह भूमि मूल रूप से जागरसाय पिता रोन्हा को कृषि कार्य के लिए शासकीय पट्टे पर आवंटित की गई थी। अधिकार अभिलेख के अनुसार सन 1957-58 में यह भूमि आबंटित हुई थी।

हद तो तब हो गई जब सन 2001 के शासकीय रिकॉर्ड के कैफियत कॉलम की भी अनदेखी कर दी गई, जिसमें स्पष्ट रूप से दर्ज है कि यह भूमि शासकीय पट्टे की है और पूर्णतः ‘अहस्तांतरणीय’ है, यानी इसे बेचा या स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, सभी नियमों को ताक पर रखकर जिला पंजीयक कार्यालय में इस प्रतिबंधित जमीन का क्रय-विक्रय दर्ज कर लिया गया। स्वतः म्यूटेशन के प्रावधान के कारण अब यह सरकारी जमीन अविनाश कुमार एवं मुस्ताक मोहम्मद (निवासी रायगढ़) के नाम पर दर्ज हो चुकी है।

स्वतः म्यूटेशन के नियम का उठाया जा रहा नाजायज फायदा

राज्य सरकार ने आम नागरिकों की सुविधा के लिए रजिस्ट्री के साथ ही स्वतः म्यूटेशन की अच्छी व्यवस्था बनाई थी ताकि लोगों को कार्यालयों के चक्कर न काटने पड़ें। लेकिन रायगढ़ जिले में भू-माफिया इस नियम का दुरुपयोग कर रहे हैं। जिला कार्यालय से मिलीभगत कर प्रतिबंधित और शासकीय पट्टे की जमीनों की रजिस्ट्री कराई जाती है, और सिस्टम स्वतः उनका नामंतरण कर देता है। इस तरह सरकारी व अहस्तांतरणीय जमीन चंद दिनों में निजी संपत्ति बन रही है।

इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या जिला पंजीयक कार्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों ने जानबूझकर रिकॉर्ड की अनदेखी की, या फिर इस बड़े सिंडिकेट के तार ऊपर तक जुड़े हुए हैं।

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